प्रतिभागियों के लिए मार्गदर्शिका


आप में से कई प्रतिभागी राष्ट्रीय जल अकादमी पहली बार आ रहे होंगे| इस पृष्ठ में आपको राष्ट्रीय जल अकादमी के साथ परिचित कराने के लिए कुछ उपयोगी जानकारियां शामिल की जा रही है| हमारा सुझाव है कि आप राष्ट्रीय जल अकादमी, पुणे आने से पहले निम्नलिखित पृष्ठों को ध्यान से पढ़ें| आप इस पूरी जानकारी के प्रिंटिंग योग्य संस्करण को डाउनलोड कर सकते हैं| हम आशा करते हैं कि हमारे साथ आपका स्टे सुखद होगा|

कार्यालय अवस्थिति

राष्ट्रीय जल अकादमी पुणे शहर के दक्षिण-पश्चिमी किनारे पर खड़कवासला गांव के पास पुणे-सिंहगढ़ रोड पर स्थित है। यह स्वारगेट बस स्टैंड से 12 किलोमीटर, पुणे स्टेशन से 18 किलोमीटर और पुणे हवाई अड्डे से 29 किलोमीटर दूर है।

पुणे हवाई अड्डा से राष्ट्रीय जल अकादमी पहुँचने के दिशा निर्देश हेतु यहां क्लिक करें पुणे हवाई अड्डा से राष्ट्रीय जल अकादमी पहुँचने के दिशा निर्देश हेतु यहां क्लिक करें

पुणे रेलवे स्टेशन से राष्ट्रीय जल अकादमी पहुँचने के दिशा निर्देश हेतु यहाँ क्लिक करें।.

राष्ट्रीय जल अकादमी में आगमन

राष्ट्रीय जल अकादमी में एक कार्यक्रम में भाग लेने हेतु परिसर में केवल पहुँचना ही कठिन है| हालांकि हम आगमन पर परिवहन उपलब्ध कराने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन वर्तमान में हम ऐसा करने में असमर्थ हो रहें हैं, खासकर तब, जब प्रतिभागी अलग अलग समय पर पहुंचते है| रेलवे स्टेशन / बस स्टेशन के लिए परिवहन आमतौर पर प्रस्थान के दिन प्रदान की जाती है| प्रतिभागियों को राष्ट्रीय जल अकादमी तक पहुंचने के लिए परिवहन की व्यवस्था स्वंय ही करनी होती है| .


चूँकि खड़कवासला पुणे की सीमा के बाहर है, तिपहिया वाहन कभी कभी यहाँ आने के लिए अनिच्छुक हो सकते है अथवा कुछ अतिरिक्त प्रभार की मॉंग कर सकते है| प्री-पेड टैक्सी सेवा पुणे रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डा पर उपलब्ध है और यहाँ आने के लिए सबसे अच्छा विकल्प है| बस सेवा रेलवे स्टेशन (रूट नं 49) से, शहर के केंद्र में स्थित शनिवारवाड़ा (रूट नं 50, 51 और 52) से उपलब्ध है| ये पिछले तीनों मार्ग (रूट नं 50, 51 और 52) भी स्वारगेट अंतर्राज्यीय बस टर्मिनस होते हुए आते हैं| बस सेवा 2230 बजे तक उपलब्ध है| रेडियो टैक्सी (ओला कैब: ऍप बुकिंग; उबेर कैब: ऍप बुकिंग; इजी राइड कैब: 020-27400800; विंग्स कैब्स 020-40100100; आदि) की सुविधा भी पुणे में उपलब्ध है| प्री-पेड टैक्सी की सुविधा भी पुणे हवाई अड्डा से उपलब्ध है| राष्ट्रीय जल अकादमी परिसर मुख्य सड़क पर छात्रावास प्रवेश द्वार के करीब बस स्टॉप के साथ स्थित है|


देर रात को पुणे में आगमन पर राष्ट्रीय जल अकादमी में पहुँचना थोड़ा मुश्किल हो सकता है| हालांकि पुणे को आम तौर पर एक सुरक्षित शहर माना जाता है, राष्ट्रीय जल अकादमी कुछ हद तक शहर की सीमा के बाहर स्थित है और आधी रात के बाद यात्रा करने के लिए के ठीक नहीं है|


राष्ट्रीय जल अकादमी में प्रतिभागियों को कार्यक्रम के पहले सत्र से अंतिम सत्र तक पूरी तरह से भाग लेना आवश्यक है| उपस्थिति प्रमाण पत्र (अटेंडेंस/पार्टिसिपेशन सर्टिफिकेट) केवल उन प्रतिभागियों को दिया जाता है जिन्होंने कार्यक्रम में पूर्ण रूप से भाग लिया हो| इसलिए सलाह दी जाती है कि यहॉं कार्यक्रम के एक दिन पहले पहुंचें और समापन दिवस को 1700 बजे के बाद प्रस्थान की योजना बनांए| प्रतिभागियों को आवंटित आवास प्रतिभागियों के अगले समूह को आबंटित करने के लिए तैयार करने की सुविधा के लिए पाठ्यक्रम के समापन के बाद 24 घंटे के भीतर खाली कर दिया जाना चाहिए|


निवास

राष्ट्रीय जल अकादमी का 55 कमरों की क्षमता का एक छात्रावास है| प्रशिक्षुओं को सामान्य रूप से साझेदारी के आधार पर समायोजित किया जाता है| सभी कमरे डबल पलंगों वाली हैं और जब एक कमरा एक प्रतिभागी को आवंटित किया जाता है तो इसे पारिवारिक आवास के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है| सामान्यतया, राष्ट्रीय जल अकादमी में प्रशिक्षण में भाग लेने वाले प्रतिभागियों के लिए पारविवारिक आवास उपलब्ध नहीं है| प्रतिभागियों को अनुरोध किया जाता है कि अगर आप अपने पति या पत्नी को साथ लाने का इरादा रखते हैं तो सर्व प्रथम स्वतंत्र आवास की उपलब्धता की पहले से जाँच कर लें| राष्ट्रीय जल अकादमी के छात्रावास में स्थित भोजनालय सस्ते एवं नियंत्रित दरों पर संपूर्ण खानपान उपलब्ध कराता है|


जलवायु एवं पहनावा

पुणे में लगभग पूरे वर्ष भर एक सम-शीतोष्ण, सुखद जलवायु का आनंद मिलता है| खड़कवासला शहर के बाकी हिस्सों की तुलना में विशेष रूप से शीतल है| मार्च, अप्रैल और मई में मौसम गर्म रहता है| नवंबर से जून के बीच हल्की सर्दी होती है| बरसात का मौसम सामान्यतया जून से सितंबर तक होता है| पहनावा आमतौर पर अनौपचारिक होता है| एक सामान्य दिशानिर्देश के रूप में, नीचे दिए गए ग्राफ को वर्ष भर में पुणे में औसत मौसम की स्थिति को पता करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है| यह तथ्य मात्र द्योतक एवं सामान्य जानकारी के लिए ही है|


कार्य का समय

पुणे में लगभग पूरे वर्ष भर एक सम-शीतोष्ण, सुखद जलवायु का आनंद मिलता है| खड़कवासला शहर के बाकी हिस्सों की तुलना में विशेष रूप से शीतल है| मार्च, अप्रैल और मई में मौसम गर्म रहता है| नवंबर से जून के बीच हल्की सर्दी होती है| बरसात का मौसम सामान्यतया जून से सितंबर तक होता है| पहनावा आमतौर पर अनौपचारिक होता है| एक सामान्य दिशानिर्देश के रूप में, नीचे दिए गए ग्राफ को वर्ष भर में पुणे में औसत मौसम की स्थिति को पता करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है| यह तथ्य मात्र द्योतक एवं सामान्य जानकारी के लिए ही है|


पुस्तकालय सुविधा

हमारे पास प्रतिभागियों के उपयोग के लिए उत्कृष्ट पुस्तकालय की सुविधा उपलब्ध है| इंटरनेट सुविधा के साथ एक कंप्यूटर केन्द्र भी उपलब्ध है| दैनिक समाचार पत्र अतिथि निवास / भोजनालय / क्लब / लाइब्रेरी में उपलब्ध कराया जाता है|


चिकित्सा सुविधायें

घर से दूर बिमार होने से परेशानी का अनुभव हो सकता है और हम उम्मीद करते हैं कि आप राष्ट्रीय जल अकादमी में अच्छे स्वास्थ्य के साथ पधारें| राष्ट्रीय जल अकादमी या इसके बिलकुल नजदीक कोई चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नही हैं| अगर एक डॉक्टर के साथ परामर्श करना आवश्यक हो तो प्रतिभागी को पुणे में डॉक्टर के पास अथवा किसी अस्पताल में ले जाने की व्यवस्था की जाएगी| केन्द्रीय जल और विद्युत अनुसंधान केन्द्र (सी.डब्ल्यू.पी.आर.एस.) के परिसर के पास कुछ औषध की दुकाने है, लेकिन वे दवाओं की केवल एक सीमित भंडार ही रखते है| यदि आपको कुछ दवाओं की आवश्यकता है, तो आप अपने साथ दवाओं की पर्याप्त आपूर्ति ला सकते है|


कपड़े धोने की सुविधा

कपड़े धोने की सुविधा छात्रावास में उपलब्ध है| कपड़े धोने के काम के लिए छात्रावास परिचर से पूछे| कृपया ध्यान दें कि राष्ट्रीय जल अकादमी में सभी गृह व्यवस्था का काम बाह्य स्त्रोत द्वारा होता है| छात्रावास के सभी कार्यकर्ता ठेकेदार के कर्मचारी है राष्ट्रीय जल अकादमी के कर्मचारी नही है| कपड़ा धोने एवं इस्त्री आदि का भुगतान प्रतिभागियों द्वारा परिचर को करना होगा| कपड़ा धोने एवं इस्त्री करने का कार्य मशीनों द्वारा किया जाता हैं|


बैंक

केनरा बैंक की एक शाखा एटीएम सुविधा के साथ केन्द्रीय जल और विद्युत अनुसंधान केन्द्र (सी.डब्ल्यू.पी.आर.एस.) के मुख्य द्वार के पास में स्थित है| छात्रावास से 1 किलोमीटर दूरी पर निकटतम बैंक है| इसके अतिरिक्त भारतीय स्टेट बैंक की एटीएम सुविधा छात्रावास के नजदीक उपलब्ध है| प्रतिभागी लेनदेन के लिए इस बैंक का उपयोग कर सकते हैं|


हल्की मरम्मत

छात्रावास के कमरे में फिटिंग (इलेक्ट्रिकल / पाइपलाइन) एवं फर्नीचर के किसी भी मामूली मरम्मत के लिए मॉंगपत्र छात्रावास परिचारक को दिया जा सकता है|


पुणे और इसके आस-पास दर्शनीय स्थल

पुणे पश्चिमी महाराष्ट्र में सहयाद्री पहाड़ियों पर 570 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है| 'डेक्कन की रानी' के रूप में लोकप्रिय यह शहर 138,76 वर्ग कि.मी. क्षेत्र में फैला हुआ है और इसकी आबादी करीब 30 लाख है| इसके सुखद जलवायु और राज्य की राजधानी मुंबई से निकटता ने पुणे को महाराष्ट्र में दूसरा सबसे महत्वपूर्ण शहर बना दिया है| पूर्व में अपनी सुखद जलवायु और शांत जीवन के लिए एक 'पेंशनरों के शहर' माना जाने वाला पुणे अब मेट्रो शहर के रूप में उभर रहा है


कई वर्षों तक पुणे मराठा भूमि की नब्ज रहा है और भारतवर्ष को इसने अपने सबसे यादगार हस्तियों में से कुछ को प्रदान किया है| मुगल सम्राट औरंगजेब को ललकारने वाले मराठा राजा शिवाजी की परवरिश पुणे मे ही हुर्इ थी| 1818 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा राज्य हड़पने से पहले तक यह शहर पेशवाओं के तहत शक्तिशाली मराठा साम्राज्य के मुख्यालय के रूप में रहा जिसके बाद यह मानसून के दौरान बंबई प्रेसीडेंसी के क्षेत्रीय राजधानी के रूप में बना रहा| पुणे कई महान व्यक्तियों के लिए प्रसिद्ध हैं जो यहॉं पैदा हुए या यहां काम किया है| इनमें से महान स्वतंत्रता सेनानी लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक, आधुनिक भारत के निर्मातओं में से एक गोपाल कृष्ण गोखले, अपने संपूर्ण जीवन में महिलाओं के उत्थान के लिए लड़ाई लड़ने व उनके लिए एक कॉलेज शुरू करने एवं महिलाओं के लिए पहले भारतीय विश्वविद्यालय की स्थापना करने वाले महर्षि धोंडो केशव कर्वे, दलित वर्गों के उत्थान के लिए कार्य करने वाले महात्मा ज्योतिबा फुले, अमेरिका में चिकित्सा शिक्षा पूरी करने वाली प्रथम महिला श्रीमती आनंदीबाई जोशी र्इत्यादि प्रसिद्ध है| पुणे का कला और संस्कृति मे (विशेष रूप से शास्त्रीय संगीत में) भी अपनी एक पहचान है|


पुणे शहर स्पष्टत: प्राचीन भाग, जहां इलाकों के नाम सप्ताह के दिनों पर रखा गया है, एवं अधिक आधुनिक भाग और आलीशान छावनी में बॅंटा हुआ है|


सिंहगड

सिंहगढ़ राष्ट्रीय जल अकादमी से लगभग 14 किलोमीटर की दूरी पर 1450 र्इसा पूर्व निर्मित एक पर्वतीय किला है| राष्ट्रीय जल अकादमी जिस राज्य राजमार्ग पर स्थित है उसका नामकरण सिंहगढ़ रोड इस किले के नाम के आधार पर ही किया गया है| 18वीं सदी में बाजीराव-1 द्वारा बनाया गया पेशवा महल का खंडहर शनिवार वाडा में स्थित है| एक लंबे समय के लिए यह महल महाराष्ट्र में राजनीतिक सत्ता का आधार रहा है और आज भी पुणे की संस्कृति की निरंतर प्रतीक बना हुआ है| मुख्य इमारत के खंडहर एवं इसके भव्य बाहरी दीवार के अलावा महल के अवशेष आज नही है| नगाड़ाखाना का बरामदा जो आंतरिक बाड़े का एक उल्लेखनीय दृश्य देता है, विशेष रूप से अविस्मरणीय है|


सारसबाग

यह एक छोटी पहाड़ी, जो कभी एक झील से परिवृत्त थी, पर बनाया गया एक प्रसिद्ध गणेश मंदिर है| कई साल पहले पार्क के लिए रास्ता बनाने के क्रम में झील को बहा दिया गया| अब यह शाम बिताने के लिए सुंदर हरे लॉन और फव्वारे के साथ एक अच्छी जगह है| पार्वती टिला पुणे के सबसे प्रसिद्ध स्थलों में से एक है| यद्यपि यह टिला शहर के दक्षिणी अर्ध में है, पुणे के लगभग हर क्षेत्र से इसे देखा जा सकता है| वहाँ 108 सीढ़ी है जो पार्वती और देवादेश्वर को को समर्पित एक मंदिर की ओर ले जाती है| वहाँ विष्णु, गणेश एवं कार्तिकेय को समर्पित मंदिर भी हैं| टिला की चोटी पर चढ़ना लाभप्रद हो सकता है क्योकि वहॉं से पुणे के एक उत्कृष्ट मनोरम दृश्य का आनंद ले सकते है|


राजा केलकर संग्रहालय

यह संग्रहालय मुगल और मराठा काल के दुर्लभ ऐतिहासिक प्रदर्शनी का अकेला संग्रह है| संग्रह में कुछ खूबसूरत चित्रों, संगीत वाद्ययंत्र, दीपक, सरौता, पदखुरचनी, एवं और कई अन्य रोचक वस्तुएं शामिल है| हालांकि मस्तानी महल, जो अपने मूल स्थिति से यहॉं लाकर पुनर्स्थापित किया गया है, संग्रहालय का मुख्य आकर्षण है|


शिंदे छतरी

महान मराठा अभिजात पुरुष महादाजी शिंदे को समर्पित यह स्मारक रेस कोर्स से 2 किमी दूर वानावाडी नामक स्थान में स्थित है| यह भवन एक महान वास्तु उपलब्धि है जो भव्य सुंदरता के साथ-साथ मितव्ययिता का मिश्रण है|


विश्रामबाग वाडा

इस तीन मंजिला हवेली इसके प्रवेश द्वार के लिए प्रसिद्ध है जो एक बरामदा से घिरा हुआ है| बरामदे के छज्जे पर नक्काशीदार लकड़ी का काम पेशवा कला का एक अच्छा उदाहरण है|


पाषाण झील

पाषाण झील पुणे से 2 किमी की दूरी पर है और विशेष रूप से सर्दियों के महीनों के दौरान यात्रा करने लायक है जब प्रवासी पक्षियॉं बड़ी तादाद में यहॉं इकट्ठा होते हैं| पक्षी विशेषज्ञों के लिए इस झील का दर्शन अति आवश्यक है|


बंड उद्यान

सुरम्य बंड उद्यान पुणे रेलवे स्टेशन से लगभग 2 किमी पर मूला-मूठा नदियों के तट पर स्थित हैं| यहॉं नदी के बैकवाटर में नाव की सवारी के लिए सुविधाएं प्रदान की जाती हैं|


आगा खान पैलेस या कस्तूरबा समाधि

यह भवन पुणे में एक प्रसिद्ध स्थान है| यह वह जगह है जहां महात्मा गांधी कस्तूरबा गांधी और महादेवभाई देसाई 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान कैद थे| यहॉं कस्तूरबा और महादेवभाई देसाई ने अपनी अंतिम सॉंसे ली थी जिनकी स्मृति में बाद में संगमरमर स्मारक बनवाया गया|


बंड उद्यान

सुरम्य बंड उद्यान पुणे रेलवे स्टेशन से लगभग 2 किमी पर मूला-मूठा नदियों के तट पर स्थित हैं| यहॉं नदी के बैकवाटर में नाव की सवारी के लिए सुविधाएं प्रदान की जाती हैं|


आगा खान पैलेस या कस्तूरबा समाधि

यह भवन पुणे में एक प्रसिद्ध स्थान है| यह वह जगह है जहां महात्मा गांधी कस्तूरबा गांधी और महादेवभाई देसाई 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान कैद थे| यहॉं कस्तूरबा और महादेवभाई देसाई ने अपनी अंतिम सॉंसे ली थी जिनकी स्मृति में बाद में संगमरमर स्मारक बनवाया गया|


भंडारकर ओरिएंटल अनुसंधान संस्थान

यह संस्थान लॉ कॉलेज पहाड़ी की तलहटी में स्थित है और अपने चित्ताकर्षक प्राच्य वास्तुकला के लिए तत्काल पहचानने योग्य है| यहाँ एक संग्रहालय है जिसमे बोल्हार, कियेलहार्न एवं भंडारकर के लगभग 20,000 पांडुलिपियों के संग्रह है।


चतुश्रृंगी मंदिर

यह मंदिर देवी दुर्गा को समर्पित है| इष्टदेवता देवी अंब्रेश्वरी है| यहॉं अश्विन माह (सितम्बर - अक्टूबर) में नवरात्रि के नौ दिनों के दौरान वार्षिक मेला आयोजित किया जाता है|


भारतीय फिल्म और टेलीविजन संस्थान

पुणे के प्रभात रोड पर स्थित यह संस्थान अभिनय, निर्देशन, संपादन, संगीत, पटकथा और फोटोग्राफी सहित फिल्म उद्योग के सभी विषयों में पाठ्यक्रम आयोजित करती है|


राष्ट्रीय रक्षा अकादमी

पुणे से 17 किमी दूर खड़कवासला के आसपास के सुरम्य परिवेश में स्थित, राष्ट्रीय रक्षा अकादमी सेना, नौसेना और वायु सेना के युवा अधिकारी कैडेटों के लिए प्रशिक्षण संस्था है


पातालेश्वर गुफाएं

नरक के देवता पातालेश्वर को समर्पित यह गुफा मंदिर शहर के शिवाजी नगर इलाके में जंगली महाराज रोड पर स्थित है| माना जाता है कि शिव, नंदी एवं विशाल खंभों को समर्पित यह मंदिर एक एकल चट्टान से खेदकर बनायी गयी है|


पुणे विश्वविद्यालय

इतालवी गोथिक शैली में निर्मित भव्य विश्वविद्यालय भवन पुणें के गणेशखिंड में स्थित है| घास के मैदान का खूबसूरती से रखरखाव किया जाता है तथा छात्रों के लिए एक बड़ा तरणताल अतिरिक्त आकर्षण है| पूर्व में यह भवन मुंबर्इ के राज्यपाल का सरकारी निवास हुआ करता था जब मानसून काल के दौरान मुंबई प्रेसीडेंसी का क्षेत्रीय मुख्यालय अस्थायी रूप से मुंबई से पुणे के लिए स्थानांतरित किया जाता था|


भारत इतिहास संशोधक मंडल

इतालवी गोथिक शैली में निर्मित भव्य विश्वविद्यालय भवन पुणें के गणेशखिंड में स्थित है| घास के मैदान का खूबसूरती से रखरखाव किया जाता है तथा छात्रों के लिए एक बड़ा तरणताल अतिरिक्त आकर्षण है| पूर्व में यह भवन मुंबर्इ के राज्यपाल का सरकारी निवास हुआ करता था जब मानसून काल के दौरान मुंबई प्रेसीडेंसी का क्षेत्रीय मुख्यालय अस्थायी रूप से मुंबई से पुणे के लिए स्थानांतरित किया जाता था|


पेशवा उद्यान

पुणे चिड़ियाघर कुछ घंटे के सुखद भ्रमण के लिए आदर्श स्थान है| इसका रखरखाव पुणे नगर निगम द्वारा किया जाता है एवं यहॉं नौका विहार और हाथी की सवारी के लिए सुविधा उपलब्ध है|


लक्ष्मी रोड

यह रोड पश्चिम में लकड़ी के पुल से पुणे छावनी के क्वार्टर गेट क्षेत्र तक फैला है| कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक सामान, आभूषण, सौंदर्य प्रसाधन, बरतन, खिलौने, उपहार वस्तुएं, मिठाई तथा सुगंधी इस रोड मे मिलते हैं एवं संभवत इस शहर के सबसे व्यस्ततम सड़क है| फेरीवाले फुटपाथ पर अपने माल को प्रदर्शित कर संकीर्ण सड़क को अव्यवस्थित कर देतें हैं| नगर परिवहन बसें, चार पहिया वाहन, दो पहिया वाहन, साइकिल, और पैदल चलने वाले सड़क पर स्थान के लिए प्रतिस्पर्धा करते है| कभी-कभी पुणेवासीयों को भीड़ के बारे में शिकायत रहती है| पुणे में खरिदारी के लिए सबसे अच्छी जगह है| अगर आप के मन में बड़ी खरीदारी की चाहत नही है, फिर भी एक शाम बिताने के लिए लक्ष्मी रोड के रास्ते पर टहलना मनोरंजक हो सकता है|



अशोक कुमार खरिया, मुख्य अभियंता


श्री खार्या मैनिट, भोपाल से तनाव और कंपन विश्लेषण में मास्टर्स पूरा करने के बाद 1988 में केंद्रीय जल अभियांत्रिकी सेवा (सीडब्ल्यूईएस) में शामिल हुए। उन्होंने रीवा के इंजीनियरिंग कॉलेज से सिविल इंजीनियरिंग में स्नातक किया है। सेवाओं में शामिल होने के बाद उन्हें लगभग तीन वर्षों के लिए हाइड्रोलॉजिकल डेटा संग्रह और बाढ़ पूर्वानुमान के फील्ड असाइनमेंट में रखा गया है।

वह पिछले 32 वर्षों से विभिन्न क्षमताओं में जल संसाधन क्षेत्र के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। उन्होंने केंद्रीय जल आयोग में निदेशक के रूप में लगभग 10 वर्षों तक भारत में जल संसाधनों से संबंधित जलवायु परिवर्तन के मुद्दों की देखभाल की। वह एक उप-समिति द्वारा तैयार किए गए सतही जल प्रबंधन खंड में योगदान के माध्यम से राष्ट्रीय जल मिशन दस्तावेज तैयार करने में सहायक रहे हैं, जिसे श्री खरिया ने इसके सदस्य-सचिव के रूप में सेवा प्रदान की थी। जून 2008 में मिशन दस्तावेज़ से पहले, CWC ने एक दस्तावेज़ प्रकाशित किया था। "प्रारंभिक समेकित

जल संसाधनों पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव पर रिपोर्ट" जो उनके द्वारा तैयार की गई थी। उन्होंने "जल संसाधन आकलन - एक राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य" का सह-लेखन किया है - एनआरएससी, हैदराबाद द्वारा प्रकाशित जल संसाधन इंजीनियरों और योजनाकारों के लिए एक तकनीकी गाइड। उन्होंने पूरा किया है। एशियाई विकास बैंक के सहयोग से जल संसाधनों पर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के अनुकूलन के लिए योजना तैयार करने के लिए अध्ययन और एडीबी के साथ एक अन्य अध्ययन "एकीकृत बाढ़ प्रबंधन के लिए परिचालन अनुसंधान" पर काम किया। उन्होंने "बाढ़ संरक्षण, कटाव-रोधी और नदी" के लिए पुस्तिका का मसौदा तैयार किया है। प्रशिक्षण कार्य" एक सीडब्ल्यूसी का प्रकाशन और "जल उपयोग दक्षता अध्ययन और सिंचाई परियोजनाओं में जल उपयोग दक्षता में सुधार के लिए डीपीआर की तैयारी" के लिए एक एनडब्ल्यूएम सचिवालय का प्रकाशन। उन्होंने विभिन्न कार्यशालाओं, सेमिनारों आदि में केंद्रीय जल आयोग का प्रतिनिधित्व किया है। जल संसाधनों पर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से संबंधित मुद्दे।

भारत सरकार ने श्री खरिया की सेवाओं को कार्यकारी निदेशक (तकनीकी) के रूप में नेपाल में पंचेश्वर विकास प्राधिकरण के साथ रखा, पंचेश्वर बहुउद्देशीय परियोजना के कार्यान्वयन के लिए भारत और नेपाल के बीच एक द्वि-राष्ट्रीय इकाई, जिसमें 5040 मेगावाट जलविद्युत उत्पादन और सिंचाई की स्थापना की परिकल्पना की गई है। 0.37 एमएचए। उन्होंने पीडीए में कार्यकारी निदेशक (वित्त) की अतिरिक्त जिम्मेदारियों को अपने कंधों पर लिया और प्राधिकरण के बुनियादी कामकाज की नींव रखी। बाद में उन्हें पीडीए के अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई। उन्होंने इन असाइनमेंट पर लगभग 3 साल बिताए।

श्री खरिया ने सीडब्ल्यूसी, नई दिल्ली में निदेशक के रूप में लगभग तीन वर्षों तक माइक-11 का उपयोग करते हुए बाढ़ पूर्वानुमान के लिए गणितीय मॉडल विकास और लगभग डेढ़ वर्ष तक देश के नदी डेटा प्रबंधन के लिए काम किया है। वह "पूर्वोत्तर जल संसाधन प्राधिकरण (NEWRA)" के गठन में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं। वह शब्द बैंक सहायता प्राप्त परियोजना के कार्यान्वयन में शामिल थे। हाइड्रोलॉजी प्रोजेक्ट- II, विशेष रूप से सीडब्ल्यूसी का हाइड्रोलॉजिकल डिजाइन सहायता (एचडीए) के विकास का घटक। उन्होंने गुवाहाटी में अधीक्षण अभियंता के रूप में उत्तर-पूर्व भारत के ब्रह्मपुत्र और बराक घाटियों में हाइड्रोलॉजिकल डेटा एकत्र करने और बाढ़ पूर्वानुमान जारी करने में लगभग तीन साल बिताए। उन्होंने इन देशों के साथ द्विपक्षीय व्यवस्था के अनुसार डेटा संग्रह और बाढ़ चेतावनी के प्रसारण के लिए चीन, भूटान और बांग्लादेश के साथ भी समन्वय किया।

उन्हें लगभग 1.5 वर्षों के लिए कोलकाता में तैनात मुख्य अभियंता के रूप में बेसिन में बाढ़ प्रबंधन और उत्तर बंगाल में आसपास के उप-बेसिन सहित भारत के उत्तर-पूर्व भाग में तीस्ता बेसिन के जल संसाधन प्रबंधन का काम सौंपा गया था। उन्होंने जलविद्युत सहित विभिन्न जल संसाधनों के मुद्दों के लिए भूटान में कार्यरत सीडब्ल्यूसी की एक फील्ड यूनिट की भी देखभाल की। उन्होंने लगभग 5 महीने तक मुख्य अभियंता के रूप में उत्तर भारत में सिंधु घाटी की सेवा की।

एक कार्यकारी अभियंता के रूप में, वे पंचेश्वर बहुउद्देशीय परियोजना - भारत और नेपाल के बीच लगभग चार वर्षों के लिए एक संयुक्त परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट की तैयारी और जांच में शामिल थे। अपने फील्ड कार्यकाल से पहले, उन्होंने प्रमुख और मध्यम सिंचाई और बहुउद्देशीय परियोजनाओं की तकनीकी-आर्थिक परीक्षा के लिए परियोजना मूल्यांकन निदेशालय में काम किया।

वह इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) के सदस्य, भारतीय जल संसाधन सोसायटी, भारतीय जल वर्क्स एसोसिएशन और भारतीय भू-तकनीकी सोसायटी (दिल्ली चैप्टर) के फेलो सदस्य हैं।

संपर्क :-
+91-20-24380678 (कार्यालय )
+91-20-24380110 (फैक्स )
ईमेल :-nwa.mah@nic.in , cenwa.mah@nic.in




एस.एन. पांडेय, निदेशक


श्री एस एन पांडे ने जी.बी. से सिविल इंजीनियरिंग में बी.टेक पूरा किया। पंत यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी, पंतनगर। उन्होंने रुड़की विश्वविद्यालय में एमई (जियोटेक्निकल इंजीनियरिंग) में भाग लिया। वे सेंट्रल वाटर इंजीनियरिंग (ग्रुप 'ए') सर्विसेज के ईएसई 1993 बैच के हैं। CWES ​​में अपने पेशेवर करियर में, उन्होंने केंद्रीय जल आयोग और जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय में विभिन्न पदों पर काम किया है। उन्हें जल क्षेत्र के विभिन्न क्षेत्रों में लगभग 24 वर्षों का अनुभव है।

सहायक निदेशक के रूप में अपनी सेवा के प्रारंभिक वर्षों के दौरान, उन्होंने जलविद्युत के अनुकूलन के लिए बहुउद्देशीय बहु-जलाशय सिमुलेशन मॉडलिंग अध्ययनों में योगदान दिया और गणितीय मॉडल आदि का उपयोग करते हुए संरक्षण आवश्यकताओं, सिंचाई आपूर्ति आदि के साथ व्यापार किया। इसके अलावा "रीयल टाइम" जैसे विभिन्न प्रकाशनों में भी योगदान दिया। जलाशयों का एकीकृत संचालन", "सूखा - एक प्राकृतिक आपदा", "तिपाईमुख जलविद्युत परियोजना के लिए जलाशय सिमुलेशन अध्ययन, जून 2000" आदि।

उप निदेशक के रूप में वे उन्नत इंजीनियरिंग/सॉफ्टवेयर उपकरणों का उपयोग करते हुए एकीकृत नदी घाटी योजना और प्रबंधन अध्ययन में शामिल थे, जैसे। सिमुलेशन मॉडल, जल विज्ञान मॉडल, डेटाबेस मॉडल, जीआईएस आदि। जल विज्ञान परियोजना चरण-I के तत्वावधान में साबरमती बेसिन (गुजरात) और ब्राह्मणी बेसिन (उड़ीसा) आदि में भोजन, लोगों और पर्यावरण के लिए पानी के उपयोग का आकलन।

कार्यकारी अभियंता के रूप में, उन्होंने सिक्किम जांच प्रभाग, सीडब्ल्यूसी में काम किया है और जलविद्युत परियोजनाओं का सर्वेक्षण और जांच कार्य किया है। उन्होंने "रंगित जलविद्युत परियोजना चरण IV, सिक्किम की डीपीआर", सीडब्ल्यूसी की तैयारी में योगदान दिया। उन्होंने रंगित चरण II की प्रीफिजिबिलिटी रिपोर्ट प्रस्तुत करने में भी योगदान दिया। उन्होंने डी एंड आर विंग में इंस्ट्रुमेंटेशन निदेशालय, सीडब्ल्यूसी में उप निदेशक के

निदेशक के रूप में, वे MoWR के TAC और CEA, विद्युत मंत्रालय के TEC के विचारार्थ क्रमशः बाढ़ नियंत्रण, जल आपूर्ति, और जलविद्युत परियोजनाओं के सिविल कार्यों के लागत अनुमान के तकनीकी मूल्यांकन में शामिल थे।

उन्होंने जल संसाधन, आरडी एंड जीआर मंत्रालय में वरिष्ठ संयुक्त आयुक्त के रूप में काम किया, जहां उन्होंने चीन और भूटान के साथ जल संसाधन क्षेत्र के क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय मामलों और भारत के उत्तर पूर्वी क्षेत्र में जल-विद्युत विकास से संबंधित मामलों, विस्तृत परियोजना की मंजूरी के साथ काम किया। अंतर्राष्ट्रीय कोण आदि से रिपोर्ट।

वह सितंबर 2018 में राष्ट्रीय जल अकादमी, पुणे में निदेशक (डिजाइन) के रूप में शामिल हुए।

संपर्क :-
+91-20-24381212 (कार्यालय )
+91-9873163630 (गतिमान )
+91-20-24380110/24380224 (फैक्स )
ईमेल :-nwa.mah@nic.in




मिलिंद पानीपटिल, निदेशक


मिलिंद पानीपाटिल ने 2000 में विक्टोरिया जुबली टेक्निकल इंस्टीट्यूट (वीजेटीआई) मुंबई से सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक किया। उन्होंने मुंबई विश्वविद्यालय में बीटेक में पहला स्थान हासिल किया। एक राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना के निर्माण में एक संक्षिप्त कार्यकाल के बाद, उन्होंने 2000 में राइट्स लिमिटेड, भारत सरकार के उद्यमों के साथ काम किया।

एक सहायक प्रबंधक के रूप में, 2000 से 2004 की अवधि के दौरान, वह एक मेगा राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना के डिजाइन और निर्माण से संबंधित थे। उनके पास सिविल इंजीनियरिंग के विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक पेशेवर अनुभव है। वर्तमान में, वह राष्ट्रीय जल अकादमी, पुणे के निदेशक के रूप में कार्यरत हैं। मिलिंद पानीपाटिल केंद्रीय जल आयोग (जल संसाधन मंत्रालय, भारत सरकार के तहत) के यूपीएससी इंजीनियरिंग सेवा, 2002 के माध्यम से केंद्रीय जल इंजीनियरिंग (समूह 'ए') सेवा (सीडब्ल्यूईएस) में 2004 (सीडब्ल्यूईएस-2002 बैच) में सहायक निदेशक के रूप में शामिल हुए। सीडब्ल्यूईएस में, उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में केंद्रीय जल आयोग, जल संसाधन मंत्रालय और राष्ट्रीय जल अकादमी में काम किया है। सहायक निदेशक के रूप में, 2004 से 2006 की अवधि के दौरान उन्होंने सीडब्ल्यूसी, नई दिल्ली के डिजाइन और अनुसंधान विंग में सेवा की और जल विज्ञान के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण विश्लेषणों और डिजाइन कार्यों से जुड़े रहे। एक सहायक आयुक्त के रूप में, 2006 से 2008 की अवधि के दौरान उन्होंने जल संसाधन मंत्रालय, नई दिल्ली के ब्रह्मपुत्र और बराक विंग में सेवा की और भारत-चीन, भारत-भूटान, उत्तर पूर्व जल संसाधन प्राधिकरण और नदी बेसिन संगठनों से जुड़े रहे।

राष्ट्रीय जल अकादमी, पुणे में 2008 से 2008 की अवधि के दौरान एक उप निदेशक के रूप में गुरुत्वाकर्षण बांध पहलुओं (जल संसाधन परियोजनाओं के विभिन्न घटकों पर; जैसे बांध, जल विद्युत संरचनाएं, जल यांत्रिक उपकरण, बैराज) के विश्लेषण और डिजाइन पर कार्यक्रमों का समन्वय कर रहा है। और नहरें)। अपर कृष्णा डिवीजन, कृष्णा और गोदावरी बेसिन संगठन में 2008 से 2012 की अवधि के दौरान एक कार्यकारी अभियंता के रूप में, पुणे में केंद्रीय जल आयोग 6 उप-मंडलों के तहत 28 साइटों पर हाइड्रोलॉजिकल टिप्पणियों के लिए जिम्मेदार था, जो महाराष्ट्र, कर्नाटक और में फैले हुए थे। गोवा। इसके अलावा, वे लगभग 1300 किमी की पूरी कृष्णा नदी के आकृति विज्ञान सर्वेक्षण कार्य के लिए भी जिम्मेदार थे।

राष्ट्रीय जल अकादमी (NWA) पुणे में 2012 से 2015 की अवधि के दौरान एक उप निदेशक (प्रशासन और समन्वय) के रूप में, वह न केवल NWA के प्रशासन और समन्वय के प्रभारी हैं, बल्कि मुख्य संकाय के साथ-साथ आहरण और संवितरण अधिकारी भी हैं। (डीडीओ) एनडब्ल्यूए, पुणे। केंद्रीय संगठन, केंद्रीय जल आयोग, नागपुर की निगरानी में मूल्यांकन निदेशालय में 2015 से 2016 की अवधि के दौरान एक उप निदेशक के रूप में महाराष्ट्र राज्यों में कृष्णा, गोदावरी और तापी बेसिन में जल संसाधन परियोजनाओं की निगरानी और मूल्यांकन के लिए जिम्मेदार था। केंद्रीय संगठन (MCO) की निगरानी में 2016 से 2020 की अवधि के दौरान एक अधीक्षण अभियंता के रूप में, केंद्रीय जल आयोग, नागपुर MCO, CWC, नागपुर के समग्र प्रशासन और समन्वय के साथ-साथ 1 डिवीजन और 4 के तहत 64 साइटों पर हाइड्रोलॉजिकल अवलोकन के लिए जिम्मेदार था। उप-मंडल जो महाराष्ट्र, तेलंगाना और मध्य प्रदेश में फैले हुए थे। निगरानी केंद्रीय संगठन में मूल्यांकन निदेशालय में 2019 से 2020 की अवधि के दौरान अतिरिक्त प्रभार में निदेशक के रूप में, केंद्रीय जल आयोग, नागपुर महाराष्ट्र राज्यों में कृष्णा, गोदावरी और तापी बेसिन में जल संसाधन परियोजनाओं की निगरानी और मूल्यांकन के लिए जिम्मेदार था।

अपने 20 वर्षों के पेशेवर सेवा के दौरान, उन्होंने निर्माण, परियोजना जल विज्ञान, जल विज्ञान अवलोकन, बाढ़ पूर्वानुमान, आकृति विज्ञान सर्वेक्षण, परियोजना मूल्यांकन, परियोजना निगरानी, ​​प्रशासन, स्थापना, वित्त, लेखा और समन्वय आदि जैसे बहु अनुशासन क्षेत्रों में अनुभव प्राप्त किया। उन्होंने भी भाग लिया। वर्ष 2016 के दौरान यूनेस्को-आईएचई-डेल्फ़्ट, नीदरलैंड में "जल संगठनों का प्रबंधन" पर अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम।

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हरीश उंबरजे, निदेशक


राष्ट्रीय जल अकादमी के निदेशक श्री हरीश अंबरजे 2004 बैच के सीडब्ल्यूईएस अधिकारी हैं। वह डॉ जे जे मगदुम इंजीनियरिंग कॉलेज, जयसिंगपुर, कोल्हापुर, महाराष्ट्र से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक हैं। उन्होंने केंद्रीय जल आयोग में विभिन्न पदों पर काम किया और जल क्षेत्र के विभिन्न क्षेत्रों में उनका अनुभव है।

सहायक निदेशक के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान गेट्स डिज़ाइन (NW&S) में काम किया - गेट्स, होइस्ट्स आदि जैसे हाइड्रो मैकेनिकल संरचनाओं के संबंध में प्रारंभिक और विस्तृत डिज़ाइन में शामिल थे, जिसमें तकनीकी विशिष्टताओं की तैयारी, निर्माता के डिज़ाइन और ड्राइंग की जांच शामिल है।

सॉफ्टवेयर प्रबंधन निदेशालय में उप निदेशक के रूप में उन्नयन, नेटवर्क और इंटरनेट प्रबंधन सहित हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर सहायता प्रदान करने के लिए जिम्मेदार है, सीडब्ल्यूसी मुख्यालय में आईटी पहलुओं में जनशक्ति का प्रशिक्षण, सीडब्ल्यूसी के लिए कंप्यूटर हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर की खरीद और सीडब्ल्यूसी वेबसाइट को बनाए रखना।

और एसडब्ल्यूआरडी कोच्चि और यूकेडी पुणे में कार्यकारी अभियंता के रूप में, नदी अवलोकन स्टेशनों के नेटवर्क के साथ हाइड्रोलॉजिकल अवलोकन (गेज, डिस्चार्ज, तलछट और जल गुणवत्ता) करने के लिए जिम्मेदार; गोवा और महाराष्ट्र राज्य में हाइड्रोलॉजिकल डेटा का प्रसंस्करण, भंडारण और पुनर्प्राप्ति और तटीय प्रबंधन सूचना प्रणाली का कार्यान्वयन। कृष्णा नदी के लिए तीन बार आकृति विज्ञान सर्वेक्षण किया है।

उन्होंने उपसमिति मुल्लापेरियार बांध के अध्यक्ष के रूप में काम किया।
वह जनवरी 2020 में राष्ट्रीय जल अकादमी, पुणे में निदेशक के रूप में शामिल हुए।

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एसपी सिंह, उप निदेशक


श्री। एसपी सिंह सेंट्रल वाटर इंजीनियरिंग (ग्रुप 'ए') सर्विसेज के ईएसई 2008 बैच के हैं। उन्होंने B.I.E.T से सिविल इंजीनियरिंग में B.Tech पूरा किया। 2003 में झांसी और 2005 में IIT कानपुर से M.Tech (हाइड्रोलिक और जल संसाधन इंजीनियरिंग)।

उन्होंने रिफाइनरी के चरण-III विस्तार परियोजना में 2006 से 2011 तक एमआरपीएल-ओएनजीसी में अभियंता (परियोजना) के रूप में काम किया। वहां वे साइट सर्वेक्षण, मिट्टी की जांच, साइट ग्रेडिंग और पूरी परियोजना के बुनियादी ढांचे के विकास कार्य और क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट (सीडीयू) और विलंबित कोकर यूनिट (डीसीयू) के सिविल और स्ट्रक्चरल हिस्से के निर्माण के साथ परियोजना प्रबंधन संबंधी कार्यों में शामिल थे।

2015 में उप निदेशक के रूप में पदोन्नति के बाद, उन्हें फिर से सीईए के टीसीडी डिवीजन में नियुक्त किया गया जहां उन्होंने भारत में सभी थर्मल पावर प्लांटों के फ्लाई ऐश उत्पादन की निगरानी के साथ-साथ थर्मल पावर प्लांटों के आरसीई के आकलन के लिए काम किया। उन्हें 2016 में केंद्रीय जल आयोग, लखनऊ के निगरानी और मूल्यांकन निदेशालय में स्थानांतरित कर दिया गया था, जहां वे जल शक्ति मंत्रालय के तहत DoWR, RD और GR की विभिन्न योजनाओं के तहत उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तावित परियोजनाओं के मूल्यांकन में शामिल थे। वह सरयू नहर परियोजना (राष्ट्रीय परियोजना) और बाणसागर नहर परियोजना की निगरानी में भी शामिल थे।

वह जनवरी, 2020 में राष्ट्रीय जल अकादमी (NWA), CWC, पुणे में उप निदेशक के रूप में शामिल हुए।

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चैतन्य के एस, उप निदेशक


श्री। चैतन्य के.एस. ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली से सिविल इंजीनियरिंग में बी.टेक पूरा किया। वे सेंट्रल वाटर इंजीनियरिंग (ग्रुप 'ए') सर्विस के ईएसई 2011 बैच के हैं।

वह जनवरी 2013 में केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) में सहायक निदेशक के रूप में शामिल हुए। सीडब्ल्यूसी में शामिल होने से पहले, उन्होंने 3 साल तक हैदराबाद मेट्रोपॉलिटन वाटर सप्लाई एंड सीवरेज बोर्ड (एचएमडब्ल्यूएसएसबी) में मैनेजर (इंजीनियरिंग) के रूप में काम किया।

इंटर-स्टेट मैटर्स निदेशालय, सीडब्ल्यूसी, नई दिल्ली में सहायक निदेशक के रूप में, वह अंतर-राज्य कोण से प्रायद्वीपीय नदी घाटियों से संबंधित प्रमुख और मध्यम सिंचाई और बहुउद्देशीय परियोजनाओं के डीपीआर/पीएफआर के मूल्यांकन में शामिल थे, उन्होंने कावेरी पर पर्यवेक्षी समिति की सहायता की। , बभाली बैराज पर पर्यवेक्षी समिति और महानदी नदी जल बंटवारा विवाद पर वार्ता समिति। वह भारत में अंतर्राज्यीय नदियों पर समझौते पर सीडब्ल्यूसी के प्रकाशन 'लीगल इंस्ट्रूमेंट्स ऑन रिवर इन इंडिया- वॉल्यूम III' के अद्यतनीकरण में भी शामिल थे, जो इस तरह का केवल एक संकलन है।

इंटर-स्टेट मैटर्स-2 निदेशालय, सीडब्ल्यूसी, नई दिल्ली में उप निदेशक के रूप में, वह प्रमुख और मध्यम सिंचाई, बहुउद्देशीय परियोजनाओं, हाइड्रो-इलेक्ट्रिक परियोजनाओं और थर्मल और औद्योगिक परियोजनाओं के लिए जल आपूर्ति प्रस्तावों के डीपीआर/पीएफआर के मूल्यांकन में शामिल थे। अंतर्राज्यीय दृष्टिकोण से गंगा, सिंधु और ब्रह्मपुत्र घाटियों ने जल क्षेत्र में अन्य देशों के साथ सहयोग से संबंधित मामलों में सहायता प्रदान की, रावी-ब्यास जल के बंटवारे के संबंध में विभिन्न अंतर्राज्यीय बैठकें आयोजित करने और जल बंटवारे संबंधी विवाद पर वार्ता समिति तिलैया धाधर परियोजना के लिए।

जल प्रबंधन निदेशालय, सीडब्ल्यूसी, नई दिल्ली में उप निदेशक के रूप में, वह भारत में जलाशय लाइव स्टोरेज स्थिति पर साप्ताहिक बुलेटिन तैयार करने में शामिल थे और फसल मौसम निगरानी समूह (सीडब्ल्यूडब्ल्यूजी)/फसल मौसम निगरानी समूह की सूखा प्रबंधन के लिए बैठकों में भाग लिया। (सीडब्ल्यूडब्ल्यूजीडीएम)। अधिक संख्या में शामिल करने के लिए एक रोड मैप तैयार करने में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान था। सीडब्ल्यूसी-जलाशय भंडारण निगरानी प्रणाली (आरएसएमएस) के तहत जलाशयों की संख्या।

नियमित काम के अलावा, उन्होंने जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित भारत जल सप्ताह (IWW) के दो संस्करणों में और सिंचाई और जल निकासी के लिए अंतर्राष्ट्रीय आयोग (ICID) द्वारा आयोजित तीसरे विश्व सिंचाई फोरम में जल नीति से संबंधित मुद्दों पर कागजी प्रस्तुति दी। ) सितंबर 2019 में बाली, इंडोनेशिया में। उन्होंने दो पत्रों का सह-लेखन किया। 'भारत में सतत जल संसाधन प्रबंधन के लिए कुशल और उत्पादक उपयोग' (तीसरा विश्व सिंचाई मंच, सितंबर 2019) और 'नीतिगत हस्तक्षेप और सतत जल के लिए संस्थागत सुधार' प्रबंधन' (सतत जल प्रबंधन पर दूसरा अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन, नवंबर 2019)।

वह अक्टूबर 2020 में राष्ट्रीय जल अकादमी (NWA), CWC, पुणे में एक उप निदेशक के रूप में शामिल हुए। उनकी रुचि के क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों की रिमोट सेंसिंग, भू-स्थानिक विश्लेषण, जल नीति संबंधी मामले, एकीकृत जल संसाधन प्रबंधन, सीमा पार सहयोग और प्रबंधन शामिल हैं। जल संबंधी संघर्ष

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जी श्रीनिवासुलु, उप निदेशक


जी. श्रीनिवासुलु, उप निदेशक, राष्ट्रीय जल अकादमी 2012 के सीडब्ल्यूईएस अधिकारी हैं। उन्होंने मार्च 2014 में सीडब्ल्यूसी मुख्यालय, नई दिल्ली में सहायक निदेशक के रूप में कार्यभार ग्रहण किया। उन्होंने एस.वी. विश्वविद्यालय, तिरुपति से इंजीनियरिंग में स्नातक (सिविल इंजीनियरिंग) की डिग्री और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे से स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग में एम.टेक की डिग्री प्राप्त की है।

स्नातक स्तर पर सिविल इंजीनियरिंग में समग्र अव्वल रहने के लिए उन्हें स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया है। उन्हें IITBHF से भी सम्मानित किया गया है। उन्होंने वर्ष 2016 में IISc बैंगलोर में शहरी बाढ़ पर मानसून स्कूल में भाग लिया। वर्ष 2014 में CWC में शामिल होने से पहले, उन्होंने सड़क और भवन विभाग, सरकार में एक संक्षिप्त अवधि के लिए सहायक कार्यकारी अभियंता के रूप में काम किया। आंध्र प्रदेश के और निर्माण कार्यों की योजना, डिजाइन, निविदा और निष्पादन में शामिल।

उन्होंने नई दिल्ली में केंद्रीय जल आयोग (मुख्यालय) के डिजाइन और अनुसंधान विंग में सहायक निदेशक के रूप में सीडब्ल्यूसी में अपना करियर शुरू किया है और इंटेक वेल सहित तटबंध बांधों के निर्माण चरण के चित्र के मूल्यांकन, डिजाइन, योजना और तैयारी से जुड़े हैं।

बाद में, उन्होंने 2 साल की अवधि के लिए मॉनिटरिंग साउथ ऑर्गनाइजेशन, सीडब्ल्यूसी, बैंगलोर में सहायक निदेशक के रूप में काम किया और लघु सिंचाई परियोजनाओं के मूल्यांकन, प्रमुख और मध्यम सिंचाई परियोजनाओं के निरीक्षण, पलार बेसिन में जल क्षमता के आकलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आरएस टूल्स का उपयोग करना, एआईबीपी परियोजनाओं के लिए केंद्रीय सहायता का प्रसंस्करण। वह डीडीओ की हैसियत से पीएफएमएस को चालू करने, ई-निविदाएं/एनआईक्यू जारी करने से भी जुड़े हैं।

ई-गवर्नेंस टूल्स जैसे पीएफएमएस, ई-ऑफिस, ई-जीईएम, ई-टेंडरिंग आदि, खातों और स्थापना मामलों पर उनकी अच्छी पकड़ है।

उनकी रुचि के क्षेत्रों में स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग में अनुसंधान, ई-गवर्नेंस टूल जैसे पीएफएमएस, ई-जीईएम, ई-ऑफिस, ई-टेंडरिंग आदि, जल प्रबंधन की उभरती अवधारणाएं, हाइड्रो इंफॉर्मेटिक्स टूल जैसे आर्कजीआईएस, माइक-11, माइक-शी शामिल हैं। , माइक-21, माइक-माउस, एचईसी-आरएएस, एचईसी-एचएमएस, इन्फोवर्क्स सीएस/आरएस/2डी, न्यूरोशेल, ईपीएएनईटी, वॉटर सीएडी आदि।

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